क्रांति को सलाम : डॉ. गया प्रसाद कटियार के स्मृति दिवस पर उन्नाव में कवि सम्मेलन आयोजित
Patelon ki Baaten
Thu, Feb 12, 2026
उन्नाव। आजादी के नायक महान क्रांतिकारी आजीवन काला पानी की सजा काटने वाले सरदार भगत सिंह के सच्चे साथी क्रांतिसृष्टा डॉ.गया प्रसाद कटियार स्मृति दिवस कार्यक्रम शहर के जय बाबा फाउंडेशन एवं मां शक्ति ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन द्वारा संचालित आयुर्वेदिक फार्मेसी कॉलेज में कवि सम्मेलन के आयोजन के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.गया प्रसाद कटियार के पुत्र इंजी. क्रांति कुमार कटियार रहे । उन्होंने गया प्रसाद जी के क्रांतिकारी जीवन की अनेकों स्मृतियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि जब पिता जी को अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया था,तो उनके पास क्रांतिकारियों से जुड़े कई दस्तावेज थे, वे दस्तावेज अगर अंग्रेजों के हाथ लग जाते तो अन्य क्रांतिकारी भी पकड़े जाते। अपने अन्य साथियों को बचाने के लिए उन्होंने कई सारे कागज चबा कर निगल डाले थे।
कवियों ने अपनी कविताओं से डॉ.गया प्रसाद कटियार को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनमें नसीर अहमद नसीर ने पढ़ा- मलयागिरि का चंदन हैं इन्हें भाल पर रखिए, आचरण इनका जीवन में ढाल के रखिए। वहीं अनिल वर्मा ने पढ़ा - सन्यासी बन कर छोड़ चला सबकुछ घर द्वार जमीदारी, पर क्रांति मार्ग में तो उनके, पत्नी थी बाधा भारी। सिंदूर स्वयं पत्नी से ही वापस पुछवाने आए थे, पति धर्म से बढ़ कर राज धर्म उनको बतलाने आए थे। डॉ. अनूप कटियार प्रिय ने पढ़ा - गया प्रसाद का संयम देखा तो संयम ने संयम खोया, पानी पानी हो काला पानी भी जी भर रोया, उनके त्यागों बलिदानों का देश रहेगा सदा ऋणी, गया प्रसाद ने जन जन में आजादी का बीजा बोया। शिव बालक राम सरोज ने पढ़ा जाने कितना अभी अंधेरा है, दूर तक अभी और चलो तब कहीं सवेरा है। डॉ. मान सिंह ने पढ़ा - भरी जवानी छोड़ दिया घर चला क्रांति के पथ पर, जैसे कोई शिकारी निकला हो चढ़ कर के रथ पर।
इस अवसर पर डॉ. गया प्रसाद कटियार पर पुस्तक का संपादन करने वाले प्रखर श्रीवास्तव की पुस्तक का विमोचन भी हुआ। उन्होंने बताया कि डॉ. गया प्रसाद कटियार क्रांतिकारियों में भगत सिंह के सबसे भरोसेमंद साथी थे। गया प्रसाद जब नैनी जेल में बंद थे तो वहां नेहरू जी से भी उनकी मुलाकात हुई, नेहरू जी ने अपनी डिस्कवरी ऑफ इंडिया पुस्तक में गया प्रसाद जी की स्मृतियों का उल्लेख किया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.राम नरेश ने की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा - डॉ. गया प्रसाद जैसे क्रांतिकारी हमारी प्रेरणा का केंद्र हैं, ऐसे महान क्रांतिकारी को जो सम्मान मिलना चाहिए , हम आज भी नहीं दे पा रहे हैं। यह हम सब के लिए चिंतन का विषय है। हमारा प्रयास होगा कि हम सब मिलकर और बेहतर इस दिशा में सार्थक कार्य करते रहें। कि तो, सूत्रधार मदहोश न हो मीनारों पर, जनयुग का फिर से कालचक्र घहराया है, दिल्लियां पांपियाई खंडहर हो जाएंगी, भारत का फ्यूजीयामा गर फट जाएगा । इस अवसर पर प्रो. डॉ. विपिन सिंह, संजय बहादुर सिंह, अवधेश बाबा, मनीष शर्मा, डॉ अनिल सिंह पटेल, डॉ आर के सिंह सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। संयोजक डॉ. राजेश सिंह से सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मान सिंह ने किया।
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