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12 फरवरी 2028 को एक करोड़ सरदारवादियों के जमावड़े का लक्ष्य आत्मसम्मान आंदोलन के 100 वर्षों के इतिहास में अर्जक संघ का महत्वपूर्ण योगदान - जी. करुणानिधि गुर्जर और कुर्मी दोनों समाज एक साथ बैठे तो क्या हुआ निर्णय? सरदार सेना के दबाव पर गार्गी पटेल के हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज लखनऊ में 31 मई को होगा अर्जक संघ का कार्यक्रम राम खेलावन पटेल जिला अध्यक्ष तथा दुखीराम वर्मा बने जिला महासचिव, आलोक वर्मा बने प्रदेश युवा अध्यक्ष राजदीप महाविद्यालय में जय श्री वल्लभ राष्ट्रकथा आयोजित भारतीय कुर्मी महासभा ने कराया एक और मृत्युभोज उत्सव का बहिष्कार राणा प्रताप सिंह अध्यक्ष और अजय कुमार सिंह मंत्री निर्वाचित महात्मा जोतीराव फुले और हम 12 फरवरी 2028 को एक करोड़ सरदारवादियों के जमावड़े का लक्ष्य आत्मसम्मान आंदोलन के 100 वर्षों के इतिहास में अर्जक संघ का महत्वपूर्ण योगदान - जी. करुणानिधि गुर्जर और कुर्मी दोनों समाज एक साथ बैठे तो क्या हुआ निर्णय? सरदार सेना के दबाव पर गार्गी पटेल के हमलावरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज लखनऊ में 31 मई को होगा अर्जक संघ का कार्यक्रम राम खेलावन पटेल जिला अध्यक्ष तथा दुखीराम वर्मा बने जिला महासचिव, आलोक वर्मा बने प्रदेश युवा अध्यक्ष राजदीप महाविद्यालय में जय श्री वल्लभ राष्ट्रकथा आयोजित भारतीय कुर्मी महासभा ने कराया एक और मृत्युभोज उत्सव का बहिष्कार राणा प्रताप सिंह अध्यक्ष और अजय कुमार सिंह मंत्री निर्वाचित महात्मा जोतीराव फुले और हम

सुचना

Mirzapur : बगही निवासी डॉ. प्रवीण की पुस्तक प्रकाशित

Patelon ki Baaten

Tue, Dec 2, 2025

कैलहट (मिर्जापुर)। चुनार थाना क्षेत्र के अंतर्गत बगही गांव निवासी डॉ. प्रवीण बाबू ने "CONTEMPORARY INDIA AND EDUCATION " नामक पुस्तक का लेखन कार्य कर अपने गांव और क्षेत्र का मान बढ़ाया है। उन्होंने यह पुस्तक अपने विद्वान सहयोगी डॉ. नवदीप रंजन के सहयोग के साथ पूरा किया।

उन्होंने इस पुस्तक में भारतीय समाज में शिक्षा व्यवस्था , विश्व के कुछ प्रमुख चिंतकों के शैक्षिक और दार्शनिक विचारों को रखा। तथा हमारे समाज में व्याप्त जातिवाद ,क्षेत्रवाद, भाषावाद के प्रभावों का वर्णन करते हुए शिक्षा के संवैधानिक प्रावधानों पर प्रकाश डाला है । इसके साथ ही शिक्षा से संबंधित विभिन्न पहलुओं, आयोगों के प्रावधानों का आधुनिक भारतीय समाज में प्रभाव का वर्णन किया है।

डॉ. प्रवीण ने अपनी इस उपलब्धि का मुख्य श्रेय अपने दादा महात्मा प्यारेलाल सिंह, पिता- विजय सिंह, छोटे पिता बृजकिशोर सिंह , छोटी माँ सुनीता देवी, पत्नी काजोल सिंह ,छोटे भाई आनंद विक्रम के साथ ही अपने गांव तथा क्षेत्र के सभी लोगों को दिया।

यह पुस्तक शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े सभी प्रशिक्षुओं, शोधार्थियों, शिक्षाविदों, प्रतियोगी परीक्षार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। इस पुस्तक की प्रमाणिकता की जांच गूगल में ISBN– 9781257133246 या पुस्तक के शीर्षक/ लेखक के नाम से किया जा सकता है।

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