राष्ट्रीय युवा दिवस : किसान पुत्र से अंतर्राष्ट्रीय युवा नेता तक डॉ. जितेंद्र सिंगरौल की प्रेरक यात्रा
Patelon ki Baaten
Mon, Jan 12, 2026
रायपुर। राष्ट्रीय युवा दिवस पर जब हम स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को याद करते हैं, तब छत्तीसगढ़ के समाजसेवी और युवा नेता डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंगरौल का जीवन भी उसी प्रेरणा का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आता है। डॉ. जीतेंद्र कुमार सिंगरौल की जीवनगाथा यह दर्शाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और सेवा भावना से व्यक्ति समाज और राष्ट्र के लिए प्रेरणा बन सकता है।
हम बात कर रहे हैं राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर बिलासपुर जिले के तखतपुर विकासखण्ड के ग्राम मोछ से निकलकर उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समाज सेवा, युवा नेतृत्व और महिला सशक्तीकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। किसान परिवार से निकलकर उन्होंने शिक्षा, समाज सेवा और नेतृत्व के रूप में युवा हस्ताक्षर के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. सिंगरौल को राष्ट्रीय युवा पुरस्कार (2007-08) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार (2000-01) से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने जापान में युथ लीडर प्रोग्राम (2011) और चीन अनुभव यात्रा (2012) में भारत का प्रतिनिधित्व कर अंतर्राष्ट्रीय पहचान बनाई।
संघर्ष की धारा से निकली रोशनी
ग्राम मोछ के किसान परिवार में जन्मे डॉ. सिंगरौल ने कठिन आर्थिक परिस्थितियों में भी शिक्षा का दीप जलाए रखा। टीवी और रेडियो सुधारने का पार्ट-टाइम काम करके उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और लोक स्वास्थ्य में उच्च शिक्षा प्राप्त की। यह संघर्ष ही उन्हें समाज सेवा की राह पर ले गया।
समाज सुधार की मिसाल
विद्यार्थी जीवन से ही उन्होंने युवाओं को संगठित कर दहेज प्रथा, अशिक्षा और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन चलाए। सामूहिक विवाह आयोजित कर उन्होंने समाज को नई दिशा दी। महिला सशक्तिकरण के लिए मितानिन कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाई और सैकड़ों महिला नेतृत्वकर्ताओं को तैयार किया।
राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहचान
• राष्ट्रीय युवा पुरस्कार 2007-08 महामहिम उप राष्ट्रपति एम. हामिद अंसारी से प्राप्त किया।
• इंदिरा गांधी राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार 2000-01 से सम्मानित हुए।
• जापान युथ लीडर प्रोग्राम 2011 में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
• चीन अनुभव यात्रा 2012 में 100 सदस्यीय दल के साथ उद्यमिता विकास पर सहभागिता की।
साहित्य और विचारधारा
डॉ. सिंगरौल ने कविताओं, लेखों और पुस्तकों के माध्यम से समाज की असमानता, जातीय मुद्दों और महिला हिंसा पर प्रकाश डाला। उनकी पुस्तक “कोरोना समस्या और समाधान” महामारी के वास्तविक कारणों और भ्रांतियों को उजागर करती है।
राष्ट्रीय युवा दिवस पर डॉ. जीतेंद्र सिंगरौल का जीवन हमें यह संदेश देता है कि संघर्ष, शिक्षा और सेवा से कोई भी व्यक्ति स्थानीय स्तर से उठकर अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुँच सकता है। वे आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव की राह दिखा रहे हैं। उनका संघर्ष, सेवा और नेतृत्व यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी समाज के लिए सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।समाज सुधार के क्षेत्र में उन्होंने सामूहिक विवाह आयोजन, महिला नेतृत्व निर्माण और ग्रामीण युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिलाने जैसे कार्य किए। राष्ट्रीय युवा दिवस पर डॉ. सिंगरौल का जीवन संघर्ष और सेवा की मिसाल बनकर युवाओं को प्रेरित करता है।
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