कुर्मियों की बातें : त्रिलोकी कुमार पटेल बिहार के दर्जन भर जिलों में जनसहयोग से चला रहे संविधान शिक्षा केंद्र
राजेश पटेल, पटना (बिहार)। बिहार के नालंदा का नाम तो सुना ही होगा। इसी जिले में पैदा हुए त्रिलोकी कुमार पटेल एक ऐसा आंदोलन चला रहे हैं, जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए, उतनी ही कम है। इनका आंदोलन कुछ सुविधाओं के लिए नहीं है। मिट्टी के कच्चे घड़े से लेकर उसे पकाकर काम लायक बनाने तक का है। मतलब, बच्चों का पूरा जीवन संवारने का।
पहले त्रिलोकी कुमार पटेल के बारे में..
बिहार के नालंदा में जन्मे त्रिलोकी के पास पटना विश्वविद्यालय से सोशल वर्क में मास्टर की डिग्री है। पीएचडी की तैयारी कर रहे हैं। त्रिलोकी ने बताया कि पहले वह चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी से जुड़े थे। भीम सेना के बिहार प्रमुख भी थे। इसके कारण विभिन्न मुद्दों को लेकर आए दिन आंदोलन करना पड़ता था। लेकिन कुछ दिनों बाद महसूस हुआ कि इन आंदोलनों से कुछ होने वाला नहीं है। समाज की स्थिति नहीं सुधरेगी। कोई ऐसा आंदोलन चलाया जाए, जिसके माध्यम से जरूरतमंदों की जिंदगी ही संवर जाए। दोस्तों से सलाह मशविरा की। तय हुआ कि स्कूल न जाने वाले गरीब बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जाए।
संविधान शिक्षा केंद्र
त्रिलोकी कुमार पटेल ने पहले समता मूलक केंद्र बनाकर एक संगठन तैयार किया। फिर संविधान शिक्षा केंद्र खोलने का निर्णय लिया। इसके माध्यम से बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक किया जाए तथा उनके अभिभावकों को संविधान प्रदत्त अधिकारों के प्रति। पहले केंद्र खोला पटना के राजेंद्र नगर के बहादुरपुर में। पैसा सब कुछ नहीं है, लेकिन पैसे के बिना कुछ हो भी तो नहीं सकता। लिहाजा पटना सचिवालय में कार्यरत पिछड़ी जाति, अति पिछड़ी जाति और अनुसूचित जाति के अधिकारी-कर्मचारियों से संपर्क किया गया। कहते हैं न कि उद्देश्य नेक हो तो सहयोगी भी मिल जाते हैं। इन लोगों से 500-500 रुपये प्रतिमाह का सहयोग मिलने लगा। इसके बाद फिर क्या। संविधान शिक्षा केंद्र की शाखाओं का विस्तार तेजी से होने लगा। मौजूदा समय में नालंदा, पटना, गया, जहानाबाद, मधुबनी, समस्तीपुर, औरंगाबाद, सासाराम, कैमूर, आरा, दरभंगा, नवादा आदि जिलों में केंद्र संचालित हैं। इनमें से किसी-किसी जिले में 25-30 केंद्र हैं। आज के समय में इनको सहयोग करने वालों की कमी नहीं है।
क्या होता है संविधान शिक्षा केंद्र में
झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों को पहले केंद्र में बैठाया जाता है। इसके लिए उनको जरूरत के सामान मुहैया कराए जाते हैं। जब बच्चा स्कूल में नियमित बैठने लगता है और प्रारंभिक ज्ञान हो जाता है तो उसका किसी अंबेडकर आवासीय विद्यालय में कक्षा एक में नाम लिखा दिया जाता है।
जो बच्चे किसी सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं, उनको स्कूल टाइम से एक घंटा पहले और एक घंटा बाद नियमित रूप से ट्यूशन दिया जाता है। इसकी जिम्मेदारी स्वयंसेवकों की है। केंद्र से निकले मैट्रिक या इंटर में पढ़ने वाले बच्चे भी पढ़ाते हैं। मैट्रिक या इंटर की शिक्षा के लिए इन बच्चों में जो एससी या एसटी क्लास के होते हैं, उनको अंबेडकर कल्याण छात्रावास और जो पिछड़ी तथा अति पिछड़ी जाति के होते हैं, उनको कर्पूरी ठाकुर कल्याण छात्रावास से जोड़वा दिया जाता है। वहां रहकर वे अपनी पढ़ाई के साथ आगे की तैयारी भी करते हैं। इन केंद्रों से निकले करीब 10 बच्चे आज के समय में सरकारी नौकरियों में हैं। कोई ग्रुप डी की नौकरी कर रहा है तो कोई सिपाही है। त्रिलोकी कुमार पटेल कहते हैं कि इससे बड़ा कोई आंदोलन है ही नहीं। इस आंदोलन से झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले बच्चों का जीवन ही संवर जा रहा है। इस कार्य से जो आत्मसंतुष्टि मिलती है, वह किसी में नहीं। एक बात और, लोग दिल खोलकर सहयोग भी करते हैं। उद्देश्य नेक जो है।
Tags :
nalanda
bihar
nitish kumar
constitution education center
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन